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सावधानी से सहायता करें ।

मददगारो सावधान 💃
 ( जो अपनी मदद खुद करते है उनकी मदद खुदा करता है )
 बाबा भारती की कहानी तो हम सभी जानते है बाबा भारती दीन दुखियो की मदद करते थे उनके पास  एक सुन्दर घोडा था जिसे एक डाकू छीनना चाहता था । एक दिन जब बाबा भारती अपने घोडे पर सवार होकर जगल के रास्ते जा रहे थे । तब डाकू अपाहिज का वेश बनाकर रास्ते मे मिला और बाबा से मदद मागने लगा बाबा ने उसे घोडे पर बिठा लिया' घोडे पर बैठते ही डाकू ने बाबा को धक्का देकर निचे गिरा दिया और घोडे पर कबजा कर लिया । तभी बाबा भारती ने डाकू से कहा था की तू यह घोडा ले जा पर कभी भी भूल कर किसी को यह बात मत बताना की मैने अपाहिज बनकर बाबा को धोखा देकर यह घोडा छीना है । नही तो संसार मे कोई किसी अपाहिज की मदद नही करेगा ।
एक  और सच्ची कहानी मदद पाने बाले की है ।
शहर मे एक गाव का भोला आदमी एक फेक्ट्री मे काम करता था ।भूकप  आने से उसका गाव  तवाह हुआ उसमे उसका घर परिवार भी तहस नहस हो गया था कुछ भी नही बचा था । इस दुख मे उसके साथी कामगारो ने अपनी महिने भर की वेतन का आधा आधा रूपया उस भोले आदमी को दिया और  उससे कहा की भाई तू अपने गाव जा और  इस पैसे से अपने परिवार और गाव बालो की मदद करना । वह भला आदमी गाव तो नही गया और  उस पैसे से एक कार खरीद लाया और  अब  उस गाडी मे अपने उन साथियो को भी नही बिठाता जन्होने उसे अपनी मेहनत की कमाई के रूपये दिये थे ।
हर  आदमी दुशरे की मदद से अपना उल्लू सीधा करना चाहता है ।मदद पाकर  आगे बढना चाहता है । मदद पा कर  आगे बढ जाता है फिर मददगार को मुडकर भी नही देखता है । असहाय  एवं दीन दुखियो की सहायता करना तो उचित है पर मदद पाने के सही हकदार  अपाहिज पात्र की पहचान करने के बाद ही मदद करना सही है । गेर जरूरत मंद सक्षम की मदद करना अनुचित है ।भारत मे भिखारीयो के बढने का मात्र सही एक कारण है । भिखारियो ने मदद पाने का विजनस बना लिया है वह लोगो को अपनी मुश्किलें बता बताकर खूब रूपये बनाते है । जितने रूपये आदमी मेहनत करके महिने भर मे कमाता है ' उससे जादा रूपये यह बेहरूपिए धोखेबाज भिखारी एक दिन मे लोगो को उल्लू बनाकर कमालेते है ।
कुपात्र की मदद करना उसे आलसी और निकम्मा बनाने का गुनाह  करना है ।और  खुद का नुक्शान करना भी है ।

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