मंगलवार, 4 अक्तूबर 2016

चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन ।

पेंटर  एम एफ हुसैन के नाम से जाना जाने बाले चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन का जन्म 15 सितंवर ?1915 मे भारत के महाराष्ट्रपंढरपुर मे हुआ था ।मॉ के दिहांत के बाद हुसैन अपने बालिद के साथ  इंदोर जले गए जहाँ उन्होने स्कूली पढाई की । हुसैन शोकिया तोर पर प्राकृतिक दृश्य बनाते थे । 1935 मे हुसेन बंबई चले गए और पैसे कमाने के लिए छोटे मोटे काम करने लगे ' पर  उनका मन तो कुछ  और ही नय करना चाहता था ।हुसेन ने कुछ कलाकर  एवं चित्रकारो के साथ मिल कर  एक  आर्ट ग्रुप बनाया ' उनकी पहली चित्र प्रदर्शनी ' सुनेहरा ससार ' बम्बे आर्ट सोसाइटी मे प्रदर्शत हुई ।
इसके बाद हुसैन ने एक घॉस के मैदान की सबसे बडे आकार की पेंटिंग बनाकर  अपना नाम गिनिज बुक मे खिला लिया ।  उनकी कार पर गोपियो के चित्र बने थे । जिसे देखकर कोई भी कह सकता था की यह किसी चित्रकार की कार है ।

एम  एफ हुसैन पहली बार प्रकाश मे अए जब  उनकी चित्र प्रदर्शनी ज्यूरिख मे लगी थी । इसके बाद  उनकी प्रदर्शनी अमेरिका यूरोप  और  अन्य देशो मे भी लगी । उनकी एक पेंटिंग 16 लाख डॉलर मे बिकी थी ' अब हुसेन  बीसवीं सदी के सबसे महगे भारतिय चित्रकार बन गए थे । भारत सरकार ने एम  एफ हुसैन को 1955 मे पदमश्री और 1991 मे पदमविभूषण पुरुस्कार से नवाजा था ।
मकबूल फिदा हुसैन का एक रूप फिल्म निर्देशक का भी था ' 1967 मे उनकी फिल्म ' थ्रू दा अॉइज  अॉफ  ए पेंटर ' आई ।फिर  उनकी फिल्म ' गजगामनी ' आई जिसमे अभिनेत्री माधुरी दीक्षित थी ' इसके बाद हूसेन ने दो तीन फिल्म और बनाई ।
मकबूल फिदा हुसेन को सुर्खीयो मे आने की महारथ थी ' इस कला मे हुसेन बहुत निपुण थे  ।वह बडी बडी हस्तियों के साथ नजर  आते थे ।सन 1971 के साओ पावलो कार्यकृम मे हुसेन साहब को मशहूर चित्रकार पिकासो के साथ  आमंत्रित किया गया था । उस समय  एक संस्था ने एम  एफ हुसैन को दुनिया के सबसे अधिक फेमस मुसलमानों की सूची मे सामिल किया था ।
विबाद 
1996 मे मकबूल हुसैन पर हिन्दु देवी देवताओ के नग्न चित्र बनाने का आरोप लगा ' जिसमे उनके खिलाप न्यायालय मे सौ के लगभग मामले दर्ज हुए थे । पर हुसेन खजुराहो के मंदिर का तर्क देकर किसी भी तरह बच निकले थे 
इसके बाद हुसेन  एक बार फिर समाचार पत्रो मे छपे जब  उन्होंने अभिनेत्री माधुरी के नंगे चित्र बनाने की घोषणा कर दी ।
2006 मे मकबूल फिदा हुसेन पर फिर  एक बार भारत माता का नग्न चित्र बनाने का आरोप लगा ' इस मामले से बचने के लिए आखिर हुसेन को भारत छोडना पडा और वह लदन चले गए ' फिर  उन्हें कतर की नागरिकता मिलगई  2011 तक चित्रकार  एम  एफ हुसैन ' कतर देश मे रहे । 9जून2011 को  लंदन के एक  अस्पताल मे दिल का दोरा पडने से मकबूल फिदा हुसेन की मोत हो गई । उनके बनाए गए चित्र  पिकासो की तरह कुछ हटके होते थे  इसलिए वह बिवादो मे आ जाते थे । एम  एफ हुसैन को भारत का पिकासो कहा जाता है । आज भी कलॉ के संसार मे एम  एफ हुसेन को याद किया जाता है

सोमवार, 3 अक्तूबर 2016

अमिताभ बचचन का एड लोकप्रिय ।

इन दिनो टीवी चेनलो पर दिखाया जाने बाला टाटा स्कइ सेट  अप बॉक्स का विज्ञापन बच्चो और महिलायो को खूब भा रहा है । क्योंकि इस  एड मे अमिताभ कठपुतली का नाच दिखा रहे है ।
अमिताभ बच्चन के एड की लोकप्रियता से पता चलता है की भारत मे "नरेन्द्र मोदी " के बाद सबसे अधिक जाना जाने बाला अगर कोई है ' तो वह  अमिताभ बच्चन हैं । अमिताभ बच्चन को भारत की 75% के लगभग जनता पहचानती है ।
अमिताभ बच्चन का संछिप्त परिचय _
अमिताभ बच्चन का जन्म स्थान बनारस है ' उनके पिता कवि हरिबंश राय बच्चन थे ' इस समय  अमित  अपने परिवार के साथ मायानगरी मुम्बई के बॉद्रा मे रहते है । उनकी पत्नी जया बच्चन झीलों की नगरी भोपाल की है ' जो कभी झील के कमल की तरह खिलती हुई अदाकारा थी अब राजनीत मे है । उनके बेटे अभिषेक बच्चन भी अभितेता है । बहू एशवरिया राय जो एक समय दुनिया की सबसे सुन्दर स्त्रियों मे गिनी जाती  थी  और  अच्छी अभिनेत्रियों मे भी ' अमित की पोती आराध्या है ।
अमिताभ बच्चन  आध्यात्मिक विषय मे भी रूची रखते है । वे ओशो से बहुत प्रभावित है ।एक जमाने मे अमिताभ भारत के भूतपूर्व प्रधान मंत्री राजीवगाँधी के अच्छे मित्र थे  ' उनकी दोस्ती अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा के साथ भी गहरी रही है ।उसी दोर मे इस जोडी की फिल्म दोस्ताना आई थी । अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्मों मे सबसे लोकप्रिय फिलमे दीवार ' शहनशाह ' शोले ' कुली ' आज का अरजुन ' बागवान प्रमुख है ।
अमिताभ बच्चन  इटरनेट पर भी एक ब्लॉगर है उनका ब्लॉग इग्लिश मे है ।अमिताभ बच्चन की सबसे बडी विशेषता यह है की इस दोर की पीडी भी उन्हें उतना ही पसंद परती है ' जितनी पुरानी पीढी करती थी और करती है ।

अमिताभ बच्चन को एड मे देखकर  एक 80 साल का बूढा कहता है _ अरे यह बूढा अभी भी नाच रहा है !

लव मेरिज ।

love 💏
प्रेम करना पाप नही है । पर प्रेमी के साथ शादी करना जरूरी नही है ।

नवरात्र मे ध्वनि प्रदूषण ।

नवदूर्गा  के आते ही ध्वनि प्रदूषण तेज हो जाता है ।जो दस दिन तक लोगों की रातों की नीद हराम करता है ।  हर झाँकी पर लाऊडस्पीकर लगे होते है जिन पर दिन रात भनन के रिकॉर्ड बजते है ।जिनसे निकलने वाली तेज ध्वनि तरंगों के कारण लोगों का ध्यान भटकता है 'विचार विषय का शोध नही कर पाता ' जिससे लोगों को काम काज के निर्णय लेने मे कठिनाई होती है । लोगों को आपसी संवाद मे भी बाधा महसूस होती है । झॉकियो पर लगे माइक की तेज  आवाज से बच्चों की पढाई भी बहुत प्रभावित होती है । कुछ दुर्गा झॉकी पर तो बडे बडे डी जे साऊड बजते है ' जिनसे निकलने बाली तेज  आवाज कान फोडती है । इस  आवाज का असर नवजात बच्चों के कान पर बहुत घातक हो सकता है ।
रवरात्र मे होने वाले ध्वनि शोरगुल के बिरोध मे आवाज उठाने पर स्थानिय दुर्गा उत्सव समीतियॉ चढ बेठती है ' उनका कहना होता है की हमारी आस्था पर ठेस पहुचाई जा रही है ।
पर धर्म की आड मे रात दिन लगातार तेज  आवाज मे माइक बजाने की मनमानी सरासर गलत है । इस विषय पर कडे नियम  कानून  लागू होने की जरूरत है । नियम  अनुसार रह झॉकी पर सुवह शाम  एक  एक घंटे पूजा आरती के समय पर ही माइक बजना एलाऊड होना चाहिए । सही मायने मे वही धार्मिक कार्यक्रम सही होता है जिससे दूशरो को असुबिधा नही होना चाहिए ।
          
                                       🌹🌹   "जय दुर्गे ' जय  अम्बे "🌹🌹

सोमवार, 26 सितंबर 2016

बुन्देली कवि ईसुरी ।

लोक कवि ईसुरी का जन्म सन 1841 को युपी के जिला झासी की माऊरानी पुर तेहसील मे मेढकी नामक गॉव मे हूआ था । ईसुरी वृहम्ण जाती के थे । उनके पिता जमीदार के याहॉ काम करते थे । ईसुरी को पढाने का बहुत प्रयास किया उनके पिता और मामा ने पर  ईसुरी का मन पढने मे नही लगा और वे अनपढ ही रहे ।ईसुरी खेतो की रखवाली का काम करते थे ' एवं खेतो की मेडो पर  एकांत मे बैठे बैठे मन ही मन कविता गढते फिर लोगो को सुनाते उनकी कविताए सुन कर लोग बहुत खुश होते ।ईसुरी की प्रेम रस की कविताए स्थानिय बुनदेलखंडी भाषा मे होती थी ।ईसुरी से प्रभावित होकर  उनके शिष्य बने ' धीरज पंडा ' जो ईसुर की कविता को लेखाकित करते थे ।उसी भाषा मे जयो की त्यो बुन्देली मेलिखते थे ।{बुन्देली भाषा बहुत प्यारी भाषा है अगर  इस भाषा मे कोई गाली भी देता है तो वह भी मीठी लगती है ।एक कवि  ने कहा है _ एसी प्यारी लगत बुन्देली ' जैसी कोई नार नवेली ।}
ईसुरी मुंशी प्रेमचंद्र की भाती जन जीवन पर  आधारित रचनाए लिखते थे ।और वे अपने जीवन पर भी कविता बनाते थे ।ईसुरी का विवाह श्यामबाई के साथ हुआ ' फिर  उनके यहाँ तीन लडकियों का जन्म हुआ ' अपने जीवन के इस पायदान पर  ईसुरी ने एक कविता तैयार की_ जब से सिर पर परी गृहस्ती ' ईसुर भूल गये सब मस्ती ।
ईसुरी की कविता से प्रभावित होकर छतरपुर के राजा ने ईसुरी के दरबारी कवि बनाने का संदेश भेजा जिसे ईसुरी ने स्वीकार नही किया ' और जवाब मे एक कविता लिख भेजी की ईसुरी को चाकरी पसंद नही है ।जब  उनकी पत्नी का दिहांत हो गया ' तो ईसुरी दूशरे गॉव मे रहने लगे जहाँ उनहे एक रंगरेजन से प्यार हो गया ।
इसमे दोराय हैं कोई कहता है की ईसुरी की प्रेमिका ' रजऊ ' उनकी काल्पनिक प्रेमिका थी जो उनकी कविताओं की पात्र थी । हकीकत जोभी हो ईसुर जाने ।सन 1909 मे ईसुरी का  दिहांत हो गया ।इसके कुछ समय बाद बुंदेलखंड की नचनारीओ ने अपने नाच के दोरान  ईसुरी की कविताए गाना शुरू किया जिससे ईसुरी का नाम दूर दूर तक जाना जाने लगा ।
इसके बाथ  ईसुरी की कविताए होली के अवसर पर फाग के नाम से गाने का चलन चला जो आज भी कायम है ।अब  ईसुरी की फागो के बिना होली के रंग फीके लगते है ।क्योंकि उनकी प्रेमरस भरी कविताए मन को छू जाती है ।ईसुरी की कविता फाग के नाम से प्रशिध है ।और  ईसुरी आज भी लोगो के दिल मे बसे है ।
ईसुरी की कविता की पंक्तियाँ _ 
ऐगर बैठ लेओ कछू कानें ' काम जनम भर रानें " 
सबसौ लागो रातु जियत भर ' जा नईं कभऊँबढानें " 
करियो काम घरी भर रै के ' बिगर कछू नईं जानें " 
इ धंधे के बीच  ईसुरी ' करत करत मर जाने ।
एसे थे बुंदेलखंड के कवि ईसुरी ।

शनिवार, 24 सितंबर 2016

केसिट बेचने बाला बना बना 'डायरेक्टर ।

मधुर भंडारकर 
यह सफलता की कहानी एक  एसे लडके की है जिसका बच्पन संघर्ष मे बीता ' फिर भी उसने अपने लक्ष्य को पा कर ही दम लिया । 26 अगस्त 1968 मे मायानगरी मुम्बई के उपनगर खार के एक गरीब परिवार मे जन्मे मधुर भंडारकर ।
मधुर जब  स्कूल मे पढ रहे थे ' उसी दोरान  उनके परिवार की आर्थिक दशा किन्हीं कारणों से बिगड़ गई । और मधुर को अपनी पढाई छोडकर काम धंधा करना पडा जिससे उनके परिवार का खर्च चल चल सके ' मधुर साइकिल से घर घर जा कर वीडियो केसिट बेचने का काम करने लगे । इस काम के दौरान वे फिल्म स्टारो के घर पर भी केसिट देने जाते थे ' उस समय के सुपर स्टार मिथुन  के घर भी मधुर केसिट पहुचाते थे ।
मधुर बच्पन से ही मेघावी थे एवं उन्हें फिल्म देखने का भी सोक था ' मधुर के मधुर संबंध फिल्मों से जुडे लोगों  के साथ थे ' इस फिल्मी माहौल मे रहने के कारण  एक डायरेक्टर ने मधुर को सहायक के तोर पर काम पर रख लिया । इस काम के दौरान मधुर ने फिल्म डायरेक्शन मे बहुत कुछ सीखा । इसके बाद मधुर को रामगोपाल बर्मा की फिल्म रगीला मे एक छोटा सा रोल मिला जिसे मधुर ने निभाया । फिर मधुर को एक  और डायरेक्टर के साथ सहायक डायरेकटर के रूप मे काम करने का मोका मिला ।
चाँदनी बार 'फिल्म
सन 2001मे मधुर के डायरेक्शन मे बनी फिल्म चाँदनी बार  आई । जिसमे मधुर के निर्देशन को काफी सराहना मिली ।और  उन्हें राष्ट्रीय पुरुस्कार से भी संम्मानित किया गया । फिल्म 'चाँदनी बार ' से प्रकाश मे आए इक्कीसबी सदी के श्रेष्ठ निर्देशक मधुर भंडारकर । इसके बाद मधुर के डायरेक्शन मे जो फिल्में बनी वे भी बहुत सफल रही । उनके डायरेक्शन मे बनी फिल्मों मे  सत्ता ' आन मेन  एट वर्क ' पेज 3 ' कॉरपोरेट ' टैफिक सिग्नल ' फेशन 'जेल ' दिल तो बच्चा है जी '  प्रमुख्य है ।उन्की ये सभी फिल्मे बहुत सफल रही । मधुर भंडारकर को  सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय पुरुस्कार भी मिला है । पटकथा लेखक  और फिल्म निर्देशक  मधुर भंडारकर  एक प्रशिद्ध हस्ती है ।

शुक्रवार, 23 सितंबर 2016

एक रुपया बंद होगा ।

भारत की मुद्रा का एक रुपया का सिक्का  अब जल्दी ही बंद होने बाला है ।वह  इसलिए कि अब  एक रुपये मे मिलता ही क्या है । अब  एक रुपये की जरूरत नाम मात्र के लिए ही रह  गई है । यह  अनुमान लग रहा है कि 2017के अंत तक देश मे एक रुपये का चलन पूरी तरह से बंद हो जाएगा ।
एक रुपया मुल्य की चंद वस्तुएं ।
माचिस ' टॉफी ' पान का पत्ता ' शेम्पो शेशै ' खाने का चूना पाऊज ' छोटी सूई ' आदि ।
एक रुपया बंद होने पर भिखारियो को लाभ होगा ' फिर  उन्हे भीख मे सीधे दो रुपये ही मिलेगे ।
एक रुपया बंद होने पर सबसे जादा लाभ  उन वस्तुओं के निर्माताओ को होगा जो वस्तुएं आज  एक रुपये मे बिक रही है ' क्योंकि फिर  इन वस्तुओ की कीमत दुगनी यानी दो रुपये हो जाएगी ।✌✌
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Seetamni@gmail. com

चूना उघोग, कम लागत, आधिक मुनाफा

  आज भारत मे 75 पैरेंट लोग पान में जो चुना खाते है।  इस चूने को बनाना और इस तरह की डिब्बी में भरकर बेचने वाले लोग भारी मुनाफा कमाई करते है।