संदेश

बोलो तो बात बने ।

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चुप रहने से कुछ ना होगा ।
बोलो तो बात बने ।
मन की बात जुवा पर ना लाने कुछ ना होगा ।
मुह खोलो तो कुछ पता चले ।
अंजाम के डर से खामोस रहो तो कुछ ना होगा ।
हिम्मत से बोलो तो अंजाम मिले ।
बोलने से पहले ही मत सोचो जबाव न होगा ।
बोलकर तो देखो जबाव हॉ मिले ।
बोलने कीआजादी है बात कहना गुनाह न होगा ।
कोइ न सुने तो भी कहने मे हमारा क्या लगे ।
बात  आज ही आभी कहो कल कहने से क्या होगा ।
पता नही कल कैसी हवा चले ।
हक के मसले मे खामोसी से कुछ न होगा ।
आवाज उठाओ तो हक मिले ।
अनजान ठिकाना पुछने सकुचाने से कुछ न होगा ।
पता पूछो तो मंजिल मिले ।
मेरे लिखने से कुछ ना होगा ।
तुम पढो समझो तो बात बने ।

जीएटी भारत कीअर्थव्यवस्धा सुधार

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एक देश एक टेेक़्स जीएसटी कानून भारत मे एक जुलाई से लागू हो गया है ।30 जून कीआधी रात कोभारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने घटी बजाकर  जीएसटी लागू किया ।

सावधानी से सहायता करें ।

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मददगारो सावधान 💃
( जो अपनी मदद खुद करते है उनकी मदद खुदा करता है )
 बाबा भारती की कहानी तो हम सभी जानते है बाबा भारती दीन दुखियो की मदद करते थे उनके पास  एक सुन्दर घोडा था जिसे एक डाकू छीनना चाहता था । एक दिन जब बाबा भारती अपने घोडे पर सवार होकर जगल के रास्ते जा रहे थे । तब डाकू अपाहिज का वेश बनाकर रास्ते मे मिला और बाबा से मदद मागने लगा बाबा ने उसे घोडे पर बिठा लिया' घोडे पर बैठते ही डाकू ने बाबा को धक्का देकर निचे गिरा दिया और घोडे पर कबजा कर लिया । तभी बाबा भारती ने डाकू से कहा था की तू यह घोडा ले जा पर कभी भी भूल कर किसी को यह बात मत बताना की मैने अपाहिज बनकर बाबा को धोखा देकर यह घोडा छीना है । नही तो संसार मे कोई किसी अपाहिज की मदद नही करेगा ।
एक  और सच्ची कहानी मदद पाने बाले की है ।
शहर मे एक गाव का भोला आदमी एक फेक्ट्री मे काम करता था ।भूकप  आने से उसका गाव  तवाह हुआ उसमे उसका घर परिवार भी तहस नहस हो गया था कुछ भी नही बचा था । इस दुख मे उसके साथी कामगारो ने अपनी महिने भर की वेतन का आधा आधा रूपया उस भोले आदमी को दिया और  उससे कहा की भाई तू अपने गाव जा और  इस पैसे से अपने परिव…

कपडा कागज बैग बनाने का अवसर ।

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भारत का दिल मध्य प्रदेश  अब पोलेथिन पन्नी के प्रदूषण से साफ हो रहा है । 24 मई2017 से मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  ने पन्नी के उपयोग पर रोक लगा दी है ।पन्नी का उपयोग करने बालो पर र्जुमाना लगेगा ।पन्नी की जगह कागज  और कपडे के बैग  उपयोग करने की सलाह दी जा रही है । अब पूरे भारत मे पन्नी का चलन बंद होने की पूरी संभावना है क्योंकि पोलेथीन पन्नी का प्रदूषण  अब चरम सीमा पर है । मध्यप्रदेश मे अब कागज  और कपडे के बैग की माँग बढने बाली है । यह समय कागज  और कपडे के बैग बनाने का उधोग लगाने का सुन्हरा अवसर है ।
👜 कपडा बैग बनाने का गृह उधोग बहुत कम लागत से स्थापित किया जा सकता है ।बस  इसके लिए एक सिलाई मशीन  जाहिए और सस्ते कपडे के थान ' लटठा और नेट के कपडे सस्ते पढते है । नेट का कपडा थोक मे कटनी से खरीदने पर सस्ता पढता है क्योंकि यहॉ नेट का कपडा बनता है । कपडे के बैग बनाने मे जादा झंझट भी नही है । इसकी मार्केटिग करना भी आसान होगा हर दुकानदार को इसकी जरूत पडेगी आखिर ग्राहक को किसी ना किसी थेले मे रखकर ही तो सामान देना होगा । कपडे की पोटली मे बॉधकर तो सामान दिया नही जा सकता है ' किरा…

दिमाग तेज करने का तारीका ।

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आदमी शारीरिक रूप से सब जानवरों मे सबसे कमजोर प्राणी है । लेकिन दिमाग के कारण  आदमी प्रथ्वी का सबसे उत्तम प्राणी माना जाता है । बैज्ञानिको के मुताविक  आज तक मनुष्य के आधे दिमाग का उपयोग ही नही हुआ है ।आधा दिमाग बंद ही है । आइंस्टीन जैसे बडे बडे बैज्ञानिक तक  अपने दिमाग का 25% तक ही उपयोग कर पाए है । मनुष्य का दिमाग पेराशूट की तरह है जितना खोलो उतना ही बढता जाता है ।
निराहार शरीर मे दिमाग बहुत तेज काम करता है । यदि यकीन ना आए तो आप  एक दिन  उपवास कर  अपने दिमाग की चाल देखिए । दुनिया का हर समझदार बक्ता निराहार रहकर ही बोलता है । कथा बाचक ' प्रबचन कर्ता या भाषण करने वाले यह निराहार या अल्प  अहार के बाद ही कुशलता से धारा प्रवाह बोलते रहते है । क्योकि निराहार शरीर मे जरठ  अग्नि को भोजन पचाने का काम नही रहता तब वह दिमाग की सहायता करती है ।
बृम्ही बूटी _ दिमाग तेज करने की सबसे तज  औषधि बृम्ही मानी गई है ।इसके सेवन से दिमाग तेज होता है ।
शीर्ष आसन करने से दिमाग कमजोर होता है । यह बैज्ञानिक तथ्य है । मनुष्य का दिमाग  इसलिए विकशित हुआ की मनुष्य ने दो पैरो पर चलना शुरू किया ।जबकि सभी जानवर च…

दूशरा मोगली ।

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मोगली 💃
सर विलियम हेनरी ने एक एसे बालक का उल्लेख किया था  जो जंगल मे भेडियो के बीच पला बढा था । यह बालक मध्य प्रदेश मे सिवनी जिले के संतबाउडी गाव मे सन 1831 मे पाया गया था ।
इस बालक के आधार पर लेखक रुडयार्ड किपलिंग  ने "दा जंगल बुक " नामक किताव लिखी है । इस किताव की कहानी का मुख्य पात्र मोगली है जो जगल मे जंगली जानवरो के बीच रहता है । दा जंगल बुक पर  एक बहुत ही रोमांचक कारटून फिल्म भी बनी है जो बच्चो की सबसे पसंदीदा फिल्म है ।
दूशरा मोगली ।
यह  एक  एसा बिचित्र बालक है जो अभी है ।यह बालक मध्य प्रदेश के रायसेन जिला के किनगी गाव मे रहता है ।यह बालक मोगली की तरह जंगली जानवरो मे तो नही रहता पर यह  एक र्दजन कुत्तो के बीच मे रहता है ।यह बालक कुत्तो से इतना घुला मिला है की सारे कुत्ते इसके इशारे पर चलते है ।यह बालक  इन कुत्तो की भाषा समझता है । सुवह होते ही यह  अट्ठा नाम का लडका अपने डोगस फ्रैंस के साथ घूमने निकल जाता है जहाँ कही भी कोई मरा हुआ मबेशी देखकर यह बालक  अपने दोस्तों को खिलाता है ।यह लडका आदमीओ मे कम कुत्तो मे अधिक रहता है । इस दूशरे मोगली मे एक  और खूबी है यह बालक जानी ली…

कंचन तेरी याद में ।

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में जब भी कभी सुनता हू प्रेम के कहीं ' 
तव में खो जाता हू ' कचन तेरी याद मे ।

में जब भी कभी पढता हू कोई प्रेम कहानी '
 तव कल्पना मे तुम दिखती हो ' कंचन तेरी याद मे ।

में जब भी कभी देखता हू कोई फिल्म कभी ' 
तब नाइका मे तुम नजर  आती हो ' कंचन तेरी याद मे ।

में उदास होकर कभी जाता हू मंदिर कभी ' 
तब राधा के रूप मे तुम्हे पाता हू ' कंचन तेरी याद मे ।

में जब भी कभी सोता हू तो देखता हू तेरा ही सपना ' 
मुझे हर बक्त तेरी फिक्र है ' कंचन तेरी याद मे ।

मे पत्थर था तुम  कंचन हो पर फिर भी अभी '
पानी मे बन गया हू ' कचन तेरी याद मे ।

मे जानता हू की तुम भी बधी हो जमाने की जंजीर से मेरी ही तरह ' 
फिर भी तुम्हें पाने के लिए क्यो मे पागल हू ' कंचन तेरी याद मे ।

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