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बालू रेत के रंगीन पत्थर ।

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नदियों की बालू रेत मे पाए जाने वाले चमकदार  और रंगीन पत्थर सबका मन मोहते है खासकर बच्चों के लिए तो यह रंगीन पत्थर हीरे मोती के बराबर होते है ।हम भी जब कभी नदियों मे नहाने जाते है और नरम रेत पर बैठते है तब हम भी इन पत्थरो से प्रभावित होकर सुन्दर सुन्दर चमकीले पत्थर चुन चुन कर बीनने बटोर कर  इकट्ठा कर लेते है ।फिर जब हम घर चलने लगते .है तो मन करता है की हम  इन पत्थरो को अपने साथ रख ले पर फिर सोचते है की आखिर हम  इन पत्थरो को घर लेजाकर क्या करेगे और पत्थरो को नदी मे ही छोड  आते .है ।
कुदरत की इस अनुपम कलॉ कृति "बालू रेत के रंगीन पत्थरो " का अगर  उपयोग किया जाए तो मकानों की दीवारो और फर्श की सजाबट के लिए यह पत्थर बडे काम की चीज है । लोग मकान बनाने के लिए बालू लाते है और  उसमे से इन रंगीन पत्थरो को छान कर  बेकार समझकर फेक देते है । अगर सूझबूझ से इन पत्थरो का उपयोग मकान की दीवारों पर कलॉ कृतियॉ बनाने मे किया जाए तो इन रंगीन पत्थरो का सद  उपयोग होगा । अभी तक तो रेत ले निकले रंगीन पत्थरो का उपयोग सीमेंट की टाइलस बनाने मे किया जा रहा है ।इसके अलाबा इनका कही कोई विशेष उपयोग नही होता …

नाम बडे और दर्शन छोटे ।

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हिंदुस्तान मे हिन्दुओ के देवी देवताओ की एक बडी संख्या है । हिन्दुओं के अनुसार हिन्दु धर्म के कुल 33 करोड देबी देवता है । भारत मे मंदिरो की भी कमी नही है । हर गॉव मे दो चार मंदिर होते है । शहरो मे तो भारी लागत से बडे बडे मंदिर बनाए गए है तीर्थ स्थानो पर तो शाहर मे जितने मकान होगे उन्से कुछ ही कम मंदिर होगे । पहाड़ों की चोटियो पर मंदिर बने है । जिन्है देखने के लिए लंबी चढाई चढना पडता है ।कुछ फेमस मंदिरो के सामने तो हमेशा भारी भीड़ होती है ।जिसे देखकर लोग सोचते है अगर  इतनी संख्या मे लोग मंदिर देखने आते है तो जरूर भीतर कुछ चमत्कार होगा पर जब  भीतर जाकर देखते है तो पाते है वही साधारण सी मूर्ती है जो हमारे गॉव के मंदिर मे होती है ।मंदिर भी उसी ईंट पत्थर सीमेंट से बना है जिससे सभी मंदिर बने है ।कुल मिलाकर दूर के ढोल सुहाने होते है ।

सुपरहिट गाने ।

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पुराने दोर से लेकर  आज तक के सबसे सुपरहिट गाने जो दिल को छू  जाते है और हमे प्रेम की गंगा मे बहाकर प्रेम के सागर मे डूबा देते है । तो आइए हम भी डूबे  प्रीत के इस सागर मे और महसूस करे अपने अपने प्यार के अहसास को  ।

बीमार पर रिस्तेदारों की मार ।

हमारे समाज मे ब्यक्ति का बीमार होना किसी गुनाह से कम नही है ! क्योंकि हमारा समाज  इसकी कडी सजा देता .है ।     आइए जाने कैसे ।
जब भी कोई बीमार होता है तो सबसे पहले तो डॉक्टर उसकी बीमारी को बढा चढा कर बताता है और मरीज को वा उसके परिवार बालो को डरा कर खूब पैसा खीचता है । पहला नुकसान तो ब्यक्ति का काम पर न जाने का होता है बीमारी के कारण ' दुशरा नुकसान इलाज पर रूपए खर्च होने का होता है । तीशरा परिवार का एक सदस्य  और काम पर नही जा पाता वह मरीज की सेवा मे रहता है । चौथा नुकसान बीमार  आदमी को देखने आने बाले करते .है दोस्त यार नाते रिस्तेदार बीमार  आदमी को देखने आते है । क्योंकि पता नही फिर वह देखने को मिलेगा या नही । मरीज के घर की औरते मरीज को देखने आने वाले महमानो के चाय नास्ते मे ही लगी रहती है । भारत के दिहाती इलाको मे अगर किसी को साधारण बुखार भी आ जाता है और  इसकी भनक रिस्तेदारो को लग जाती है तो वह  उसे देखने जरूर  आते है आखिर रिस्तेदार होते किस लिए है सुख दुख मे साथ रहने के लिए ही ना । बीमार  आदमी को आराम की जरूरत होती है पर दर्शनाथियो की भीड बीमार  आदमी की तबियत  और खराब करती है ।

बोलो तो बात बने ।

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चुप रहने से कुछ ना होगा ।
बोलो तो बात बने ।
मन की बात जुवा पर ना लाने कुछ ना होगा ।
मुह खोलो तो कुछ पता चले ।
अंजाम के डर से खामोस रहो तो कुछ ना होगा ।
हिम्मत से बोलो तो अंजाम मिले ।
बोलने से पहले ही मत सोचो जबाव न होगा ।
बोलकर तो देखो जबाव हॉ मिले ।
बोलने कीआजादी है बात कहना गुनाह न होगा ।
कोइ न सुने तो भी कहने मे हमारा क्या लगे ।
बात  आज ही आभी कहो कल कहने से क्या होगा ।
पता नही कल कैसी हवा चले ।
हक के मसले मे खामोसी से कुछ न होगा ।
आवाज उठाओ तो हक मिले ।
अनजान ठिकाना पुछने सकुचाने से कुछ न होगा ।
पता पूछो तो मंजिल मिले ।
मेरे लिखने से कुछ ना होगा ।
तुम पढो समझो तो बात बने ।

जीएटी भारत कीअर्थव्यवस्धा सुधार

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एक देश एक टेेक़्स जीएसटी कानून भारत मे एक जुलाई से लागू हो गया है ।30 जून कीआधी रात कोभारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने घटी बजाकर  जीएसटी लागू किया ।

सावधानी से सहायता करें ।

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मददगारो सावधान 💃
( जो अपनी मदद खुद करते है उनकी मदद खुदा करता है )
 बाबा भारती की कहानी तो हम सभी जानते है बाबा भारती दीन दुखियो की मदद करते थे उनके पास  एक सुन्दर घोडा था जिसे एक डाकू छीनना चाहता था । एक दिन जब बाबा भारती अपने घोडे पर सवार होकर जगल के रास्ते जा रहे थे । तब डाकू अपाहिज का वेश बनाकर रास्ते मे मिला और बाबा से मदद मागने लगा बाबा ने उसे घोडे पर बिठा लिया' घोडे पर बैठते ही डाकू ने बाबा को धक्का देकर निचे गिरा दिया और घोडे पर कबजा कर लिया । तभी बाबा भारती ने डाकू से कहा था की तू यह घोडा ले जा पर कभी भी भूल कर किसी को यह बात मत बताना की मैने अपाहिज बनकर बाबा को धोखा देकर यह घोडा छीना है । नही तो संसार मे कोई किसी अपाहिज की मदद नही करेगा ।
एक  और सच्ची कहानी मदद पाने बाले की है ।
शहर मे एक गाव का भोला आदमी एक फेक्ट्री मे काम करता था ।भूकप  आने से उसका गाव  तवाह हुआ उसमे उसका घर परिवार भी तहस नहस हो गया था कुछ भी नही बचा था । इस दुख मे उसके साथी कामगारो ने अपनी महिने भर की वेतन का आधा आधा रूपया उस भोले आदमी को दिया और  उससे कहा की भाई तू अपने गाव जा और  इस पैसे से अपने परिव…